देशी एवं विदेशी गायो में अंतर :-

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देशी गाय

 

देशी गाय की पीठ पर एक कूबड़ होता है और इनकी गर्दन लटकी हुई होती है |

यह एक देशी भारतीय गाय है जैसे कि शाहीवाल , गीर इत्यादि |

इसका दूध श्रेणी ए 2 के अंतर्गत आता है  जो स्वास्थ के लिए बहुत ही अच्छा है  |

इसके  दूध में वसा की मात्रा 7% तक होती है |

यदि देशी भारतीय गाय का बछड़ा मर जाता है तो वह दूध देना बंद कर देती है और खाना या पीना भी नहीं  करती | यह भावनाओं से भरा हुआ है तो जो कभी भी उसका दूध पीता है वह वफादार, कर्तव्यवान और उनके वृद्ध, माता-पिता और शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करता है ।

यह बहुत सुंदर और भावनाओं से भरा है |

देसी गाय काफी स्वस्थ होती है और इनमे रोगो से लडने की क्षमता भी काफी ज्यादा होती है ।

यह गर्म और ठंडे मौसम को सहन करने मे सक्षम  होती है |

यह गर्म जलवायु में अच्छा दूध देती है |

यह कम खाती है |

 

विदेशी गाय

 

विदेशी गाय की पीठ पर कूबड़ नहीं होता और इनकी पीठ सपाट होती है | यह गाय की तरह दिखता है लेकिन गाय नहीं है |

इसका दूध श्रेणी ए 2 के अंतर्गत आता है जो स्वास्थ के लिए बहुत ही खतरनाक है |

इसके दूध में वसा की मात्रा 7% तक होती है |

यदि विदेशी गाय का बछड़ा मर जाता है तो यह  दूध देना बंद नहीं करती और खाना और पीना भी नहीं छोड़ती । यह भावनाहीन होती है । वे लोग जो विदेशी गाय के दूध पीते हैं, वे अपने बुजुर्ग, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान नहीं करते ।

ये रोगों के लिए अधिक संवेदनशील होती  हैं |

यह गर्मी के मौसम में कम दूध देती है |

ये कम बछड़ो को जन्म देती है | ।

यह बहुत खाती है |

 

देशी एवं विदेशी गायो में अंतर :-

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